-परिवहन निरीक्षक के पास मिली थी आय से अधिक संपत्ति 14 साल बाद 4 साल की सजा, 60 लाख का जुर्माना

उज्जैन। आय से अधिक संपत्ति मामले में 14 साल बाद आये फैसले में  तत्कालीन परिवहन निरीक्षक को 4 साल की सजा सुनाई गई है, साथ ही 60 लाख के अर्थदंड से दंडित किया गया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर सजा का एक साल बढ़ जायेगा।
लोकायुक्त संगठन भोपाल को वर्ष 2011 में परिवहन निरीक्षक सेवाराम खांडेगर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिली थी। 11 सितंबर 2011 को मामले में प्रकरण दर्ज कर लोकायुक्त उपपुलिस अधीक्षक ओपी सागोरिया की टीम ने परिवहन निरीक्षक के अलखनंदा नगर स्थित मकान पर छापा मारा था। आलीशान मकान में विलासिता का हर सामान, आभूषण, नगदी, वाहन मिलना सामने आये थे। प्रकरण की विवेचना उपपुलिस अधीक्षक एसएस उदावत ने शुरू की थी, इस दौरान सामने आया था कि निरीक्षक खांडेगर की आय से 572 प्रतिशत अधिक संपत्ति उनके पास है। उनकी कुल आय 27.37 लाख से कुछ अधिक रही है, लेकिन उनके पास 1.84 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। विवेचना पूरी होने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1ई), 13 (2), का प्रकरण दर्ज कर 30 अगस्त 2014 को अभियोग पत्र लोकायुक्त की ओर से विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। इस दौरान लम्बी सुनवाई न्यायालय में चली और 14 साल बाद सोमवार को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवासी अधिनियम) फैसला सुनाते हुये तत्कालीन निरीक्षक को आय से अधिक संपत्ति का दोषी करार देते हुये 4 साल की सजा और 60 लाख के अर्थदंड से दंडित किया।
एक साल की बढ़ सकती है सजा
विशेष न्यायालय की ओर से सजा के साथ सुनाये 60 लाख के अर्थदंड पर कहा गया कि अगर जुर्माना अदा नहीं किया गया तो आरोपी को सजा एक साल अतिरिक्त भुगतना होगा। फैसले के बाद न्यायालय में मौजूद आरोपी को लोकायुक्त टीम ने अपनी कस्टडी में लिया और भैरवगढ़ जेल भेज दिया। प्रकरण में लोकायुक्त संगठन की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनोज पाठक और बाद में अंश पैरवीकर्ता संजय मीणा डीडीपी द्वारा अभियोजन का संचलान किया।  प्रकरण में आरक्षक संजीव कुमारिया ने सहयोग किया।

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